प्रतिनिधिमंडल की कलेक्टर से सकारात्मक वार्ता, बोले ग्रामीण-या तो झाब को ही समिति बनाओ या चितलवाना में यथावत रखो
जालोर.झाब पंचायत समिति बहाली की मांग को लेकर मंगलवार को झाब सहित आसपास के 24 गांवों के लोग बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय जालोर पहुंचे। झाब बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले पहुंचे ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के 29वें दिन प्रतिनिधिमंडल की कलेक्टर डॉ. प्रदीप केशवराव गावंडे से वार्ता हुई, जिसे संघर्ष समिति ने सकारात्मक बताया।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि पहले झाब को पंचायत समिति मुख्यालय घोषित किया गया था, जिसमें 20 गांव चितलवाना पंचायत समिति और 4 गांव सांचौर पंचायत समिति के शामिल थे, लेकिन कुछ ही समय बाद आदेश बदलकर भादरुणा को मुख्यालय बना दिया गया। यह निर्णय जनभावनाओं के विपरीत है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि या तो झाब को ही पंचायत समिति मुख्यालय बनाया जाए या फिर पूर्व की तरह चितलवाना पंचायत समिति में यथावत रखा जाए।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन

पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नहीं, बल्कि निर्णय से असंतुष्टि को लेकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए है। कलेक्ट्रेट के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस जाप्ता तैनात रहा। कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हुई, लेकिन प्रशासन की सूझबूझ से हालात नियंत्रित रहे। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक धरने पर बैठ गए।

देर शाम महेंद्रसिंह, बाबूलाल चौधरी सहित प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और मांगों को आगे तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का आग्रह किया। कलेक्टर ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मामले को सक्षम स्तर तक भेजने का आश्वासन दिया।

संघर्ष समिति ने बताया कि पंचायतों के नवसृजन के तहत पहले झाब को पंचायत समिति घोषित किया गया था, फिर आदेश निरस्त कर भादरुणा को मुख्यालय बना दिया गया। झाब क्षेत्र की जनसंख्या अधिक होने के साथ यहां पुलिस थाना सहित कई सरकारी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं, जबकि भादरुणा में इन सुविधाओं की कमी बताई जा रही है। इसी को लेकर 29 दिनों से आंदोलन जारी है। इससे पहले 13 जनवरी को ट्रैक्टर-ट्रॉली रैली निकालकर चितलवाना उपखंड मुख्यालय में भी ज्ञापन सौंपा गया था।


